जोएल को ऐसी चीज़ें लेने की गंभीर आदत थी जो उसकी नहीं थीं। कभी-कभी वह कुकी के डिब्बे से माँ के अभी-अभी बनाए हुए कुकीज़ चुपके से निकाल लेता, या बिना पूछे नैथन के जादुई रंगीन मार्कर इस्तेमाल करने के लिए उठा लेता। बात और बिगड़ जाती, जब पकड़े जाने पर जोएल झूठ बोलता या बहाने बनाता। माँ और पिता को जोएल को कई बार सज़ा देनी पड़ी। उन्होंने उसे बताया कि अगर वह अनुमति माँगे बिना छोटी-छोटी चीज़ें लेना जारी रखेगा, तो बड़े होने पर वह बड़ी चीज़ें चुराने लग सकता है।
और परमेश्वर चोरी से घृणा करता है!
एक दिन माँ जूते खरीदने के लिए जोएल और नैथन को वीवर के कंट्री स्टोर ले गईं। “माँ, देखिए,” काउंटर पर रखे चमचमाते जेब-चाकुओं की ओर उत्साह से इशारा करते हुए जोएल ने कहा। “क्या आप कृपया मेरे लिए एक खरीद देंगी?”
“नहीं, जोएल,” माँ ने जवाब दिया। “जेब-चाकू के लिए तुम्हें बड़े होने तक इंतज़ार करना होगा।”
“ठीक है,” जोएल ने कुछ निराश होकर जवाब दिया।
बाद में, जब माँ नैथन को जूते पहना रही थीं, जोएल फिर से जेब-चाकुओं के पास दुकान के अगले हिस्से में जा पहुँचा। वह उन्हें लालसा से देखने लगा। “वह सफ़ेद वाला कितना सुंदर है,” उसने मन ही मन सोचा। “काश, वह मुझे मिल जाता! माँ समझती ही नहीं कि मैं इतना बड़ा हो गया हूँ कि मेरे पास एक हो सकता है। मेरी उम्र के बाकी सभी लड़कों के पास जेब-चाकू हैं।” तभी उसके मन में एक और बुरा विचार आया। “मुझे लगता है, मैं बस उस सफ़ेद वाले को उठा लूँगा। किसी को कभी पता नहीं चलेगा।” जोएल ने दुकान के पीछे की ओर देखा, जहाँ श्री वीवर नैथन को जूते पहना रहे थे। कोई देख नहीं रहा था, इसलिए उसने फुर्ती से हाथ बढ़ाया, काउंटर पर रखे डिब्बे से सफ़ेद जेब-चाकू निकाला और अपनी जेब में डाल लिया।
घबराकर मुड़ते हुए जोएल गलियारे में वापस चल पड़ा। उसका सिर धक-धक करने लगा और उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था कि उसे डर था कहीं सब सुन न लें। उसे उम्मीद थी कि माँ नैथन को जूते पहनाने में और समय लेंगी। तब शायद उन्हें यह नज़र नहीं आएगा कि उसका चेहरा कितना लाल और गर्म हो रहा है। माँ को हमेशा पता चल जाता था कि कुछ गड़बड़ है।
लेकिन इस बार माँ को कुछ पता नहीं चला और जल्द ही वे घर के लिए चल पड़े। कुछ दिनों बाद, जोएल को एहसास हुआ कि चोरी का जेब-चाकू रखना कोई मज़ेदार बात नहीं थी। पकड़े जाने के डर से वह शायद ही कभी उसका इस्तेमाल कर पाता था। ज़्यादातर समय उसे उसे अच्छी तरह छिपाकर रखना पड़ता था!
कई हफ़्ते बीत गए। फिर एक शाम, नैथन रसोई में आया, जहाँ जोएल और माँ रात के खाने के बर्तन धो रहे थे। “देखिए, माँ! मुझे यह जेब-चाकू सोफ़े के गद्दे के नीचे मिला। पता नहीं यह कहाँ से आया?”
जब जोएल ने माँ को जेब-चाकू की जाँच करते देखा, तो उसका दिल बेतहाशा धड़कने लगा। उसका मन हुआ कि वह बाहर दौड़ जाए और गायब हो जाए। उसी शाम उसने जेब-चाकू को सोफ़े के गद्दे के नीचे सरका दिया था, जब माँ अचानक बैठक में आ गई थीं और उन्होंने बताया था कि रात का खाना तैयार है। उसने कभी नहीं सोचा था कि वहाँ किसी को वह मिल जाएगा।
अचानक उसे एहसास हुआ कि माँ उसकी ओर देख रही थीं। “जोएल, क्या तुम्हें पता है यह कहाँ से आया?” उन्होंने पूछा।
“ओह! अ… अच्छा… आ… मुझे लगता है कि चचेरे भाई माइक के पास भी ऐसा ही एक सफ़ेद वाला है,” जोएल हकलाया। “शायद… आ… पिछली शाम जब वे हमसे मिलने आए थे, तो यह उसकी जेब से निकलकर गिर गया होगा।”
“अच्छा… खैर, मुझे इस बारे में आंटी ईवा से पूछना होगा,” माँ ने शांत स्वर में कहा और जेब-चाकू को खिड़की की चौखट पर रख दिया।
जोएल बहुत दुखी महसूस कर रहा था। ऐसा लग रहा था मानो माँ की उदास आँखें उसकी हर हरकत पर नज़र रखे हुए हों। काश, उसने वह जेब-चाकू कभी चुराया ही न होता! जब भी वह उसे चौखट पर रखा देखता, तो ऐसा लगता कि उसका आकार बढ़ता जा रहा है! उसने जल्दी सोने का फैसला किया, लेकिन आँखें बंद करते ही उसे वही भद्दा सफ़ेद जेब-चाकू दिखाई देता, जो खिड़की की चौखट से उसे घूर रहा था!
अगले दिन माँ ने जोएल को अपने पास बुलाया। उनके हाथ में सफ़ेद जेब-चाकू था। “आज मैंने आंटी ईवा को फ़ोन किया, और उन्होंने कहा कि माइक के पास कोई जेब-चाकू नहीं है। अब, जोएल, मुझे बताओ… तुम्हें यह जेब-चाकू कहाँ से मिला? और याद रखना, झूठ बोलने से कोई फ़ायदा नहीं होता,” माँ ने दृढ़ता से कहा। उन्होंने उसकी ठुड्डी के नीचे हाथ रखकर उसका झुका हुआ सिर उठाया, ताकि वह उनकी आँखों में देखे।
“मैंने… आ… इसे वीवर की दुकान से लिया था,” जोएल हकलाया।
“क्या तुम्हें एहसास है कि यह चोरी थी?” माँ ने पूछा।
“हाँ, मुझे एहसास है, और मैं… मैं इसके बारे में झूठ बोलने के लिए भी माफ़ी चाहता हूँ। मैं फिर कभी ऐसा कुछ नहीं करूँगा। जब से मैंने इसे चुराया है, तब से… आ… मुझे बहुत बुरा लग रहा है,” सिसकियों से काँपते हुए जोएल ने रुंधे गले से कहा।
“जोएल, यह सुनकर मुझे खुशी हुई,” माँ ने कहा। “पिता और मैं परमेश्वर से तुम्हारी झूठ बोलने और चोरी करने की इस समस्या में मदद करने की प्रार्थना करते रहे हैं। आज शाम जब पिता घर आएँगे, तो तुम्हें उन्हें सब कुछ बताना होगा। फिर पिता और मैं तय करेंगे कि तुम्हें क्या सज़ा मिलनी चाहिए। उसके बाद हम तुम्हें वापस दुकान ले जाएँगे और तुम जेब-चाकू श्री वीवर को दे सकोगे। और चूँकि तुमने चाकू इस्तेमाल किया है, इसलिए तुम्हें अपने पैसे से उसका दाम चुकाना होगा।”
जोएल को पिता और श्री वीवर का सामना करने से बहुत डर लग रहा था, लेकिन बाद में, जब सब कुछ हो गया, तो उसे बहुत अच्छा महसूस हुआ। उस दिन जोएल ने एक ऐसा सबक सीखा जिसे वह कभी नहीं भूला।


