प्रभु, यह पीड़ा असहनीय लगती है।
जो कभी प्रिय था, अब उसे मरना होगा।
कितने ही दिल लहूलुहान हैं।
किसी की आँखें सूखी नहीं रहीं।
हम रोए, तड़पे और प्रार्थना की,
प्रभु, यह प्याला हमसे दूर करने की विनती की।
हमने वह सब किया जो हमें लगा कि शायद इसे बदल दे,
पर हर कोशिश निष्फल ही लौटती दिखी।
पिता, हमने दया के लिए पुकारा,
काश, सब इस पीड़ा से बच निकलते।
पर प्रभु, आपने हमें इससे होकर जाने को कहा;
आपने इसमें अपना हाथ स्पष्ट कर दिया।
जब हम सोचते हैं कि
आप आख़िर कर क्या रहे हैं, तो हमारा मन चक्कर खाता है।
फिर भी हम जानते हैं कि हमारी भावनाएँ चाहे जो हों,
इस तूफ़ान से होकर जाने का कोई कारण है।
इसलिए पिता, अब हम आपके चरणों में झुकते हैं,
आपकी सर्वशक्तिमान सामर्थ्य को स्वीकार करते हुए।
हम हर बात का पूरा ब्योरा नहीं समझ सकते,
पर भरोसा है कि अंत में सब ठीक होगा।
पिता, हमें टूटने में मदद दें,
अपना सब कुछ आपको सौंपने में।
अपने अधिकार, सपने, महत्वाकांक्षाएँ और संपत्ति,
सब कुछ आपकी दृष्टि के सामने रखते हुए।
प्रभु, हममें नम्रता बढ़ाएँ,
शांत, फिर भी गहरी और सच्ची।
यह ऐसा रत्न है जिसे केवल परीक्षाएँ ही सिखा सकती हैं।
प्रभु, इस सबके द्वारा हमें अपने जैसा और बनाएँ!
पिता, हमारी आँखें आप पर लगी रहें,
इस विकराल आँधी पर नहीं।
क्योंकि आप इन गहरे जलों से होकर गुज़रे हैं,
आपकी योजना के सिवा कुछ भी सफल नहीं होगा।
मृत्यु तक आज्ञाकारी, प्रभु,
चाहे इसकी कीमत कितनी ही बड़ी क्यों न लगे।
हमें स्वर्गीय ख़ज़ाने का दर्शन दें,
जिसका मूल्य किसी भी सांसारिक कीमत से बढ़कर है।
–एड्रिआना एच. फ़ैंटन द्वारा


