मेरे मन में उठते हैं कितने सवाल;
जिनके जवाब मुझे मिलते नहीं बेहाल।
जब देखता हूँ भाइयों को, जो सहमत नहीं हो पाते,
तो सोचने लगता हूँ … क्या मेरे लिए भी आशा है?
हम सब एकता में क्यों नहीं रह सकते?
क्या यह संभव नहीं? क्या हम समझ नहीं सकते?
हमारे बीच इतना कलह क्यों है?
भाई भाई के विरुद्ध—ओह, कितना बड़ा पाप है!
हमने ऐसा क्या किया, जिसे परमेश्वर गलत कहते हैं;
कि वे हमारी आशीष ले लें और हमारा गीत छीन लें?
क्या हमने प्रभु से अपनी निगाहें और प्रेम हटा लिया है?
क्या हम पाप में गिर पड़े हैं और शायद अपनी तलवार भी छोड़ दी है?
अगर यही वजहें हैं कि जीवन ऐसा है,
तो क्या आप सहमत नहीं होंगे कि प्रार्थना करने का समय आ गया है?
और परमेश्वर से विनती करें कि किसी तरह हम
एकता में रह सकें?
मुझे नहीं लगता कि मैं कभी समझ पाऊँगा
कि “मसीही” आपस में इतना झगड़ कैसे सकते हैं।
अगर वे बस बाइबल की बात मान लें,
तो जीवन भर एक-दूसरे से प्रेम कर सकते हैं!
अगर हम एक-दूसरे से पूरे मन से प्रेम कर सकें,
तो सचमुच मेरा विश्वास है कि यही कुंजी है।
दुःख से भरी इस दुनिया में हम और कैसे जी सकते हैं,
अगर बाइबल की बताई राह पर न चलें?
यह सब मैंने इसलिए कहा है कि यह बात कह सकूँ;
मसीह में बने बिना हमारा जीवन सही राह पर नहीं है।
हम नहीं जान सकते कि हमें कैसी-कैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा,
अगर हम अपना जीवन परमेश्वर के उद्धारकारी अनुग्रह के अनुसार न जिएँ।



