और हम जानते हैं कि सब बातें मिलकर भलाई के लिए काम करती हैं
उनके लिए जो परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए जो बुलाए गए हैं
उसके उद्देश्य के अनुसार –रोमियों 8:28.
“मैं सोच रहा था कि अगले हफ़्ते, जब स्कूल की छुट्टी है, हम कहीं घूमने जा सकते हैं।” आर्थर ने उपयोगिता-कक्ष में अपनी टोपी खूंटी पर टाँगते हुए और अपनी पत्नी की ओर मुड़ते हुए कहा। “तुम्हें यह विचार कैसा लगता है?”
मर्टल, जो रसोई में रात का खाना बनाने में व्यस्त थी, मुस्कराते हुए ऊपर देखने लगी। “यह तो बहुत अच्छा रहेगा। मैं भी कुछ ऐसा ही सोच रही थी। मुझे यक़ीन है कि बच्चों को भी छुट्टी पर जाना अच्छा लगेगा।”
“तो फिर अगले रविवार को बेथेल फेलोशिप की मंडली में जाने की योजना क्यों न बनाएँ?” आर्थर ने आगे कहा। “क्या यह तुम्हारे लिए ठीक रहेगा?”
“हाँ, मुझे ठीक लगता है,” मर्टल ने जवाब दिया। “ऐसा लगता है कि किसी दूसरी मंडली में गए हमें थोड़ा समय हो गया है। तुम कब निकलने की सोच रहे थे?”
“मैंने अभी पक्की योजना नहीं बनाई है,” आर्थर ने जवाब दिया, “लेकिन मैं गुरुवार को निकलने और सोमवार को घर लौटने की सोच रहा था।”
“मुझे यह ठीक लगता है,” मर्टल ने जवाब दिया।
“ठीक है,” आर्थर ने कहा। “मैं भाई ऑस्कर पीट को पत्र भेजने की योजना बनाऊँगा, ताकि उन्हें बता सकें कि हम आ रहे हैं।”
अगले गुरुवार को कॉबलेंट्ज़ परिवार पेंसिल्वेनिया के लिए रवाना हुआ।
परिवार के उत्तर की ओर जाते हुए कई मील बिना किसी घटना के बीत गए। वे अपनी मंज़िल के क़रीब पहुँच ही रहे थे कि अचानक आर्थर की तबीयत ख़राब हो गई। उसने गाड़ी सड़क से हटाकर रोक दी, ताकि पेट का सारा सामान उलट सके। परिवार धीरज से इंतज़ार करता रहा और सोचता रहा कि अब उन्हें क्या करना चाहिए।
“क्या तुम्हें लगता है कि हमें आगे जाना चाहिए?” मर्टल ने पूछा। भाई ऑस्कर के घर पहुँचने में अभी एक घंटा और लगता।
“मुझे नहीं लगता कि मैं आगे जा सकता हूँ,” आर्थर ने कमज़ोर आवाज़ में जवाब दिया। “अब मुझे बहुत चक्कर आ रहे हैं। शायद अब तुम्हें गाड़ी चलानी चाहिए,” उसने मर्टल से कहा।
जल्द ही ड्राइवर की जगह बदल गई। उदास मन से परिवार मुड़ा और घर की ओर चल पड़ा। पूरे परिवार के लिए यह कठिन था, ख़ासकर बच्चों के लिए। वे पूरे हफ़्ते इस यात्रा का बेसब्री से इंतज़ार करते रहे थे, और अब उनकी योजनाएँ बिगड़ गई थीं।
घर पहुँचने पर मर्टल डाक लेने के लिए डाकपेटी के पास रुकी। उसने डाक आर्थर को थमाई, फिर गाड़ी अपने घर के रास्ते पर आगे बढ़ाई।
“अरे… यह क्या है?” एक जाना-पहचाना लिफ़ाफ़ा देखकर आर्थर हकलाया। उसने लिफ़ाफ़ा फाड़कर खोला और जो देखा, उस पर उसे विश्वास नहीं हुआ। “वह पत्र जो मैंने भाई ऑस्कर पीट को भेजा था!” भला वह वापस क्यों आ गया था? लिफ़ाफ़ा पलटते ही उसका मन बैठ गया। “इतनी सारी बातों में, मैं लिफ़ाफ़े पर टिकट लगाना ही भूल गया!” उसने कहा। “यह कितनी मूर्खता थी!”
उस शाम खाने की मेज़ पर परिवार ने फिर चर्चा की कि लिफ़ाफ़े के कोने पर टिकट लगाना भूल जाना कितना मूर्खतापूर्ण लगा था। “फिर भी,” आर्थर ने आश्चर्य से कहा, “परमेश्वर ने यह सब पहले से तय कर रखा था। अगर वह पत्र भाई ऑस्कर तक पहुँच जाता, तो वे हमारी मेज़बानी की तैयारी कर रहे होते। लेकिन इस तरह उन्हें यह भी पता नहीं चला कि हम मिलने आ रहे थे।”
“जो परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उनके लिए सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती हैं,” मर्टल ने जवाब दिया।

